“क्यों डरें कि ज़िंदगी में क्या होगा कुछ नहीं होगा तो तज़ुर्बा होगा”
ये महज़ एक लाइन नहीं बल्कि करोड़ों टूटते हुए सपनों के लिए ऑक्सीजन है। जब दिल्ली की किसी अंधेरी गली में बैठा एक लड़का अपनी आखिरी उम्मीद खो रहा होता है
तब एक शांत और सधी हुई आवाज़ आती है और सारा डर छू-मंतर हो जाता है। आज भारत के हर उस घर में जहाँ कोई सपना पला है वहाँ एक ही नाम गूँजता है Vikas Divyakirti।
लोग उन्हें सिर्फ़ एक शिक्षक नहीं बल्कि एक इमोशन मानते हैं। आखिर क्या जादू है उस इंसान में जिसने UPSC जैसी पहाड़ जैसी परीक्षा को चाय की चुस्की जैसा आसान बना दिया? IAS की कुर्सी रुतबा और सरकारी गाड़ी लोग इसके लिए जान दे देते हैं पर एक शख्स ने इसे लात मार दी। क्यों?
इस ब्लॉग में हम कोई बोरिंग कहानी नहीं सुनाएंगे, बल्कि उस ‘पागलपन’ की बात करेंगे जिसने एक अफ़सर को हिंदुस्तान का सबसे चहेता शिक्षक बना दिया। हम खोलेंगे उन राज़ों को जो आपको Wikipedia पर नहीं मिलेंगे तैयार हो जाइए क्योंकि इस लेख के खत्म होने तक आपको वो सीक्रेट कोड मिल जाएगा जिससे विकास सर ने हताशा के मलबे से आत्मविश्वास का किला खड़ा कर दिया |
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डॉ. विकास दिव्यकीर्ति: पारिवारिक और निजी जानकारी
| श्रेणी | वास्तविक जानकारी |
| पूरा नाम | डॉ. विकास दिव्यकीर्ति |
| जन्म तिथि | 26 दिसंबर, 1973 |
| जन्म स्थान | हरियाणा, भारत |
| पिता का नाम | श्री त्रिलोक सिंह (हिंदी साहित्य के विद्वान) |
| माता का नाम | श्रीमती सरस्वती देवी (हिंदी शिक्षक) |
| पत्नी का नाम | डॉ. तरुण वर्मा (दृष्टि IAS की सह-संस्थापक) |
| पुत्र का नाम | सात्विक दिव्यकीर्ति |
| भाई | दो बड़े भाई (एक IPS अधिकारी और एक LIC अधिकारी) |
| शिक्षा | BA, MA, M.Phil, PhD, LLB, Post-Graduate in Translation UPSC |
| UPSC सफलता | 1996 बैच (प्रथम प्रयास) |

डॉ.Vikas Divyakirti की जीवनी और उनका सफर
विकास दिव्यकीर्ति आज के समय में सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के लिए भरोसे का दूसरा नाम हैं। वे पहले एक IAS अधिकारी थे और आज ‘दृष्टि IAS’ के मालिक और एक मशहूर टीचर हैं। उनकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि उन्होंने पद और पावर के बजाय ज्ञान बाँटने के रास्ते को चुना। उनका यह सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।
इस सफर की शुरुआत 1996 में हुई, जब उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में UPSC की परीक्षा पास की और गृह मंत्रालय में ऑफिसर बन गए। लेकिन, उन्हें दफ्तर की बंधी-बधाई नौकरी में वो खुशी नहीं मिल रही थी। उनके मन में हमेशा एक बात चलती थी कि एक अफसर बनकर वो उतने लोगों की मदद नहीं कर पाएंगे, जितना एक शिक्षक बनकर कर सकते हैं।
बस इसी सोच की वजह से उन्होंने IAS जैसी बड़ी नौकरी छोड़ दी। यह एक बहुत ही हिम्मत वाला फैसला था, क्योंकि इतनी बड़ी कुर्सी छोड़ना हर किसी के बस की बात नहीं होती। आइए अब करीब से जानते हैं उनके जीवन के उन 6 बड़े सच को, जिन्होंने उन्हें आज यहाँ तक पहुँचाया है।
Vikas Divyakirti: नेटवर्थ
| विवरण | जानकारी |
| कुल नेटवर्थ अनुमानित | ₹20 – ₹25 करोड़ विभिन्न रिपोर्ट्स के अनुसार |
| आय का मुख्य स्रोत | दृष्टि IAS कोचिंग संस्थान |
| डिजिटल कमाई | यूट्यूब एडसेंस करोड़ों सब्सक्राइबर्स |
| लेखन/रॉयल्टी | UPSC अध्ययन सामग्री और पुस्तकें |
| अन्य आय | सेमिनार, पॉडकास्ट और वेब प्रोजेक्ट्स |
| सामाजिक योगदान | हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति और दान |
| जीवनशैली | सादगीपूर्ण और उच्च बौद्धिक विचार |

Vikas Divyakirti का प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
डॉ. Vikas Divyakirti का जन्म 26 दिसंबर, 1973 को हरियाणा के एक मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ उनका पालन-पोषण ऐसे माहौल में हुआ जहाँ साहित्य और भाषा को पूजा जाता था।
उनके पिता श्री त्रिलोक सिंह और उनकी माता, दोनों ही हिंदी साहित्य के विद्वान और शिक्षक थे यही कारण है कि शुद्ध हिंदी और बेहतरीन संवाद शैली उन्हें विरासत में मिली।
- शिक्षा की तपस्या: उनकी बौद्धिक यात्रा दिल्ली विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन कॉलेज से शुरू हुई। उन्होंने हिंदी साहित्य में BA, MA, M.Phil और PhD की उपाधि प्राप्त की। ज्ञान की प्यास यहीं नहीं रुकी उन्होंने LLB किया और अनुवाद Translation में भी महारत हासिल की।
- शुरुआती संघर्ष: आज विख्यात शिक्षक होने के बावजूद विकास सर ने बहुत ही सामान्य दिन देखे हैं। संघर्ष के दिनों में उन्होंने अपने खर्चों के लिए सेल्समैन का काम भी किया और घर-घर जाकर कैलकुलेटर बेचे। इसी अनुभव ने उन्हें लोगों के मनोविज्ञान को समझने की कला सिखाई।
- हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए उम्मीद: 1999 में ‘दृष्टि IAS’ की स्थापना कर उन्होंने सिद्ध कर दिया कि भाषा कभी ज्ञान के मार्ग में बाधा नहीं हो सकती। उन्होंने दर्शनशास्त्र जैसे कठिन विषयों को तार्किक और सरल बना दिया।
- आधुनिक युग के ‘लोकप्रिय गुरु’: वे सिर्फ UPSC नहीं पढ़ाते, बल्कि संविधान, इतिहास और नैतिकता को कहानियों की तरह समझा देते हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ अफ़सर बनाना नहीं, बल्कि एक ‘सभ्य और जागरूक नागरिक’ बनाना है।
- मानसिक स्वास्थ्य पर प्रहार: आज के तनावग्रस्त दौर में डिप्रेशन और मानसिक समस्याओं पर उनके विचार युवाओं के लिए ‘मरहम’ की तरह काम करते हैं।
डॉ. Vikas Divyakirti व्यक्तिगत जानकारी
| विवरण | जानकारी |
| लंबाई | 5 फीट 9 इंच |
| वजन | 75-80 किलो |
| आंखों का रंग | गहरा भूरा |
| बालों का रंग | काला और सफेद |
| त्वचा का रंग | गोरा |
| पेशा | शिक्षक, लेखक और दृष्टि IAS के संस्थापक |
| पसंदीदा भोजन | सादा भारतीय घर का खाना दाल-चावल |
| पसंदीदा किताबें | रश्मिरथी, गुनाहों का देवता, सपियंस, दिव्या |
| पसंदीदा शौक | पढ़ना, लिखना और दार्शनिक चर्चाएं |
6 बड़ी उपलब्धियां जिन्होंने इतिहास रच दिया
1. पहली कोशिश में UPSC फतह
1996 में अपने पहले ही प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग की देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा उत्तीर्ण करना उनकी शुरुआती और बड़ी शैक्षणिक उपलब्धियों में से एक है। ये सिर्फ एक सफलता नहीं थी बल्कि लाखों युवाओं के लिए पहली बार में भी मुमकिन है का भरोसा था ।

2. हिंदी माध्यम की क्रांति
उन्होंने दृष्टि IAS के माध्यम से हिंदी माध्यम के छात्रों के परिणामों में ऐतिहासिक सुधार की नींव रखी आज देशभर में हज़ारों अधिकारी उन्हें अपना मार्गदर्शक मानते हैं क्योंकि उन्होंने साबित किया कि भाषा प्रतिभा की दीवार नहीं होती।
3. सफल लेखक और संपादक
वे ‘दृष्टि करेंट अफेयर्स टुडे’ जैसी मशहूर मैगजीन के मुख्य संपादक भी हैं। यह पत्रिका हर साल लाखों छात्रों तक देश-दुनिया की खबरें बहुत ही आसान भाषा में पहुँचाती है। UPSC की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए तो यह पत्रिका एक जरूरी साथी की तरह है, जिसके बिना उनकी पढ़ाई पूरी नहीं होती।
4. डिजिटल माध्यम में लोकप्रिय शिक्षक
डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म्स पर उनके करोड़ों फ़ॉलोअर्स और अरबों व्यूज़ हैं। उनकी बातों को सिर्फ अभ्यर्थी ही नहीं, हर उम्र के लोग सुनना पसंद करते हैं क्योंकि वे ज्ञान को डर नहीं भरोसा बनाकर देते हैं।
5. फ़िल्म 12th Fail में भूमिका
वास्तविक जीवन पर आधारित फ़िल्म 12th Fail में उन्होंने स्वयं की भूमिका निभाई। इस छोटे से लेकिन असरदार दृश्य ने शिक्षा के प्रति उनकी सादगी और प्रतिबद्धता को बड़े पर्दे पर भी जीवंत कर दिया।
6. हिंदी भाषा का मान बढ़ाया
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अदालतों में भी हिंदी भाषा को सम्मान दिलाने की खुलकर वकालत की है। उनका मानना है कि हिंदी का प्रयोग सही और सरल तरीके से होना चाहिए। उनकी सोच बिल्कुल साफ है ज्ञान की भाषा वही होनी चाहिए, जिसे आम जनता आसानी से समझ सके। इसी वजह से वे हमेशा अपनी बात जनता की भाषा में रखने पर जोर देते हैं।
अगर आप भी अपने सपनों को सही दिशा देना चाहते हैं

तो संघ लोक सेवा आयोग UPSC या किसी भी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में सबसे बड़ी चुनौती होती है सही मार्गदर्शन और निरंतरता। जिस प्रकार दृष्टि IAS ने हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों के लिए सफलता के नए मार्ग खोले उसी विचारधारा के साथ हम भी छात्रों को मजबूत आधार और ईमानदार मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
डॉ.Vikas Divyakirti सम्मान और गौरवमयी उपलब्धियां (1996 – 2026)
| वर्ष | सम्मान/उपलब्धि | विवरण |
| 1996 | UPSC क्रैकर सम्मान | अपने पहले ही प्रयास में भारत की सबसे कठिन परीक्षा उत्तीर्ण करने का गौरव। |
| 2000s | हिंदी साहित्य रत्न | दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा पीएचडी (PhD) के दौरान शोध कार्यों के लिए सराहना। |
| 2018 | यूट्यूब क्रिएटर अवार्ड्स | डिजिटल माध्यम से शिक्षा को घर-घर पहुँचाने के लिए सिल्वर और गोल्ड प्ले बटन। |
| 2022 | आदर्श शिक्षक सम्मान | विभिन्न छात्र संगठनों और शैक्षणिक संस्थानों द्वारा ‘सर्वश्रेष्ठ मार्गदर्शक’ का सम्मान। |
| 2023 | सिनेमैटिक डेब्यू सम्मान | फिल्म ’12th Fail’ में उनके वास्तविक व्यक्तित्व को पर्दे पर दिखाने के लिए विशेष सराहना। |
| 2024-25 | ग्लोबल इंफ्लुएंसर अवार्ड | शिक्षा और मानसिक स्वास्थ्य पर उनके वैश्विक प्रभाव के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म्स द्वारा सम्मान। |
| 2026 | लोकप्रिय जन-गुरु सम्मान | करोड़ों फॉलोअर्स और छात्रों के बीच सबसे भरोसेमंद ‘एजुकेशनल आइकन’ बनने का गौरव। |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Q1. विकास सर ने दृष्टि IAS की स्थापना कब की थी?
उन्होंने 1 नवंबर 1999 को दिल्ली में ‘दृष्टि IAS’ संस्थान की नींव रखी थी।
Q2.डॉ. विकास दिव्यकीर्ति की उम्र कितनी है?
उनका जन्म 26 दिसंबर, 1973 को हुआ था। वर्तमान में उनकी आयु लगभग 52 वर्ष है।
Q3.क्या डॉ. विकास दिव्यकीर्ति अभी भी UPSC के छात्रों को पढ़ाते हैं?
हाँ, वे आज भी दृष्टि IAS के माध्यम से छात्रों का मार्गदर्शन करते हैं और विशेष रूप से दर्शनशास्त्र और निबंध लेखन जैसे विषयों के लिए विख्यात हैं।
Q4. विकास दिव्यकीर्ति सर की पत्नी कौन हैं?
उनकी पत्नी का नाम डॉ. तरुण वर्मा है।
Q5. क्या विकास सर बहुत अमीर हैं?
उनकी सटीक संपत्ति सार्वजनिक नहीं है लेकिन वे सादगी और दान-पुण्य के लिए जाने जाते हैं |
निष्कर्ष
डॉ. Vikas Divyakirti का जीवन संघर्ष और सफलता की एक मिसाल है डॉ. विकास दिव्यकीर्ति की यह यात्रा हमें सिखाती है कि सही दृष्टिकोण और ईमानदार मार्गदर्शन से किसी भी लक्ष्य को पाया जा सकता है। उन्होंने एक अफ़सर की सुरक्षित कुर्सी इसलिए छोड़ी क्योंकि उनके भीतर का शिक्षक लाखों ‘अफ़सर’ तैयार करने का सपना देख रहा था।
आज जब हम दृष्टि IAS की सफलता को देखते हैं, तो वह केवल एक कोचिंग संस्थान नहीं, बल्कि उस अटूट भरोसे का प्रतीक है जो डॉ. साहब ने 1999 में एक छोटे से कमरे से शुरू की थी।
हमें उम्मीद है कि डॉ. Vikas Divyakirti सर के जीवन का यह सफर आपके भीतर भी एक नया जोश भर देगा। अब आप देर मत कीजिए, क्योंकि सही समय पर लिया गया एक सही फैसला ही आपको आपकी मंज़िल तक पहुँचाता है।
आपकी बारी: विकास सर की कौन सी बात या विचार ने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? या फिर UPSC प्रतियोगी परीक्षा को लेकर आपका कोई सवाल है?
हमें कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताएं। साथ ही इस ब्लॉग को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करना न भूलें जो अपनी ज़िंदगी में कुछ बड़ा करने का सपना देख रहे हैं। याद रखिए आपकी एक शेयरिंग किसी की प्रेरणा बन सकती है!
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